जानिए! ”रोटी” का शानदार इतिहास

रोटी के बारे मे तो आप जानते ही होंगे । और हम सभी लोग रोटी बनाकर खाते भी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोटी की खोज किसने की थी? और रोटी का इतिहास क्या है ? दोस्तों इस लेख के अंदर हम जानेंगे कि रोटी की खोज किसने की थी ?

‌‌‌रोटी को चपाती ,सफारी, शबाती, फुलका और रोशी के नाम से जाना जाता है। रोटी आमतौर पर गेंहू के आटे की , मक्का और बाजरे की बनाई जाती है।भारत, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, पूर्वी अफ्रीका और कैरिबियन में  मे रोटी बड़े चाव से खाई जाती है। गेंहू के आटे के अंदर पानी और नमक मिलाकर रोटी बनाई जाती ‌‌‌है।

‌‌‌उसके बाद तवे पर इसको पकाया जाता है। ‌‌‌पहले रोटी को पकाने के लिए चूल्हे का इस्तेमाल होता था। लेकिन अब अधिकतर लोग रोटी को पकाने के लिए गैस का इस्तेमाल करते हैं। चपत  शब्द का मतलब होता है थप्पड़ जो हाथों की गीली हथेलियों के बीच आटे को थपकी देकर पतले आटे को गोल बनाया जाता है।बाजरे की रोटी बनाने के लिए इसी तरीके का प्रयोग किया जाता है।

चपाती को 16 वीं शताब्दी के दस्तावेज ऐन-ए-अकबरी में अबू-फजल इब्न मुबारक, के अंदर भी उल्लेख किया गया है। मोहनजो-दड़ो की खुदाई में खोजे गए कार्बोनेटेड गेहूं के दाने आज भी भारत में पाए जाने वाले गेहूं की एक स्थानिक किस्म के हैं। कुछ जानकार बताते हैं कि रोटी को भारतिए लोगों ने ही सबसे पहले विदेश के अंदर प्रस्तुत किया था।

‌‌‌रोटी बनाने के लिए सबसे पहले गेंहू के आटे को छाना जाता है। उसके बाद उसके अंदर नमक मिलाया जाता है। और पानी डाल कर आटे को गूंथा जाता है। अच्छी तरह से आटा गूंथ लेने के  बाद उसके पेडे बनाये जाते हैं। और फिर एक बेलन और चकले की मदद से गोल रोटी बनाई जाती है। बनी हुई रोटी को तवे पर डाल कर पकाया जाता है। ‌‌‌अच्छी तरह से पकने के बाद रोटी फूल जाती है।

रोटी की खोज किसने की थी ? ‌‌‌रोटी का इतिहास

‌‌‌रोटी का आविष्कार किसने किया इस बारे मे कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। बस कुछ धारणाएं प्रचलती हैं। कुछ लोगों का यह विष्वास है कि रोटी का आविष्कार 5000 साल पहले सिंधु घाटी की सभ्यता से हुआ था।वहीं कुछ लोग यह भी मानते हैं कि रोटी का आविष्कार पूर्वी अफ्रीका ‌‌‌के अंदर हुआ था और बाद मे इसको भारत मे लाया गया था।जबकि एक अन्य प्रमाण के अनुसार रोटी का आविष्कार दक्षिणी भारत के अंदर हुआ था।

रोटी का उल्लेख 6000 साल पहले से पुराने संस्कृत पाठ में किया गया है। यह भी कहा जाता है कि यह 1556 में अकबर को रोटी बहुत पसंद थी।उस समय भारत के अंदर क्रषी प्रमुख व्यवसाय था । लोग गेहूं की खेती व बाजरे की खेती करते थे । और गेहूं के आटे को चक्की जिसकी हाथ से चलाया जाता था। से पीसकर लोग रोटी बनाते थे। ‌‌‌रोटी के आविष्कार के बाद यह जल्दी ही लोक प्रिय हो गई क्योंकि इसको बनाना आसान था। हल्का और पकाने मे भी आसान था।यह जल्दी से एक दक्षिण एशियाई भोजन बन गया था।

‌‌‌रोटी को इतनी ज्यादा लोकप्रियता मिली की विदेशों के अंदर भी लोग रोटी बनाना सीख गए ।और जो भी यात्री यात्रा करता था। वह रोटी अपने साथ लेकर यात्रा करता था ताकि लंबी यात्रा के अंदर वह उसे खा सके । 1857 के संग्राम के अंदर भी रोटी का प्रयोग अंग्रेजों ने सेना को देने मे किया । इसके अलावा रोटी भी ‌‌‌अंग्रेजों का सबसे प्रिय भोजन बन चुकी थी। इसके अलावा रोटी को लोकप्रियता आवाजाही से भी मिली भारतिए लोग विदेशों के अंदर जाकर बस गए तो उन्होंने अपने खाने को भी वहां पर प्रचार प्रसार किया । इसी वजह से विदेशी लोग भी रोटी को बनाना सीख गए ।

‌‌‌वैसे एशियाई खाना  विदेशों के अंदर बहुत ही लोक प्रिय है। आज भी ऐसा है। यदि हम समोसे की बात करें तो एक समोसा अमेरिका के अंदर 5 डॉलर तक मिलता है। और उतना अच्छा भी नहीं होता है। जबकि 5 डॉलर के यहां पर 350 रूपये होते हैं।

रोटी के प्रमाण मिस्र के अंदर भी मिलते हैं। जहां पर एक महिला की 3500 साल पुरानी कब्र मिली है। उस कब्र के अंदर एक टोकरी भी मिली है। उस टोकरी के अंदर गेंहू की बनी हुई रोटी भी मिली है। ‌‌‌इसके अलावा मिस्र के अंदर और कब्रों के अंदर भी रोटी के प्रमाण मिले हैं।न्युयोर्क  के अंदर इन पुरानी चीजों को रखा गया है।इसके अलावा प्राचीन मिस्र के लोग रोटी बनाने के बारे मे नहीं जानते थे । इस वजह से गेहूं के दानों को मोटा मोटा पीस कर पानी मिलाकर खा लते थे । हेरोडोटस ने अपनी एक किताब मे यह लिखा था कि मिस्र के लोगों को आटे गूंथने के बारे मे कोई जानकारी नहीं थी। वे आटे को अपने पैरों से गूंथते थे । हालांकि पैरों से आटा गूंथने की परम्परा तो आज भी है।

यूरोप  की बात करें तो वहां पर रोटी बाजार के अंदर बेची जाती थी। और राजा की तरफ से एक व्यक्ति को रोटी बनाने का अधिकार दिया हुआ होता था। और जिनते भी लोग रोटी खाते थे ।वे केवल उसी व्यक्ति से रोटी को लेकर खाते थे । जर्मनी  और फ्रांस के अंदर भी कई प्रकार की रोटियां बनाए जाने का उल्लेख मिलता है। यहां लोग रोटी का व्यापार करते थे ।

‌‌‌आर्य नहीं जानते थे रोटी के बारे मे

आर्य लोग गेंहू का प्रयोग नहीं करते थे । वे रोटी के बारे मे भी नहीं जानते थे । आर्य लोग जौ वैगरह का सेवन करते थे । ऋग्वेद के अंदर भी रोटी का उल्लेख नहीं है । उस समय लोग गेहूं से अनजान थे । इसके अलावा यज्ञ के अंदर भी यह लोग चावल का प्रयोग करते थे । और चावल ही इनका प्रिय भोजन था।

भाव प्रकाश और रोटी का इतिहास

भाव प्रकाश नामक एक ग्रंथ अकबर के समय लिखा गया था। इस ग्रंथ के अंदर रोटिका की कई विशेषताओं का उल्लेख मिलता है। इसके अलावा रोटी के फायदे भी बताए गए थे ।‌‌‌रोटी पाचन मे हल्की होती है और पोष्टिक भी होती है। मुगलों के समय परांठे का आविष्कार भी हुआ था। आज परांठा काफी लोकप्रिय हो चुका है।

श्रीलंका  और रोटी का इतिहास

श्रीलंका के अंदर 3 प्रकार की रोटियां सबसे अधिक पसंद की जाती हैं।पोल रोटी जिसको  गेहूं का आटा, कुरकान का आटा, या दोनों का मिश्रण,  से बनाया जाता है।कोट्टू रोटी भी लंका के अंदर पसंद की जाती है। इसके अलावा गोडाम्बा रोटी ‌‌‌भी यहां पर खाई जाती है। गोडम्बा रोटी  के साथ खाई जाती है।इंडोनेशिया में रोटी परयाराम, रोटी गन्ना, या रोटी कोंडे  जैसे अलग अलग नामों से रोटी को जाना जाता है।

विश्व की सबसे बड़ी रोटी 

रोटी के इतिहास के बारे मे व रोटी का आविष्कार कैसे हुआ ? इस बारे मे हम जान ही चुके हैं तो चलते हुए यह भी जान लेते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी रोटी किसने बनाई है ? सबसे बड़ी चपाती 145 किलो (319 पाउंड 10 औंस) है और 22 सितंबर 2012 को भारत के जामनगर में दगडू सेठ गणपति सर्वजन महोत्सव (भारत) द्वारा बनाई गई थी। चपाती को 3 मीटर (10 मीटर) से 3 मीटर वाली धातु की प्लेट पर बनाया गया था।

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