नशा छीन रहा बचपन,नशे के सौदागर घोल रहे जिंदगी में जहर

सीतापुर  से मोनु कश्यप की रिपोर्ट-

सीतापुर में नशा के सौदागर अपने थोड़े से आर्थिक लाभ के लिए बचपन से लेकर युवा होती पीढ़ी को उस गहरी खाई में धकेल रहे हैं जहां से निकल पाना काफी दुष्कर होता है।शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में नशा बड़ी तेजी से पांव पसार कर बच्चों से उनका बचपन छीन रहा है तो कई किशोरों को विक्षिप्तों सी हरकत करते देखा जासकता है बच्चों में नशा करने की आदत बीते कुछ वर्षों से ही पनपी है।

कबाड़ बीन कर बेचने,भीख मांगकर गुजारा करने वाले परिवारों के बच्चों से शुरू हुई यह लत इस कदर बढ़ चली है कि प्रायः शहर के लालबाग,रेलवे सिटी स्टेशन, दुर्गापूर्वा, काशीराम कालोनी, सहसापुर, अन्य कई बस्तियों में ऐसे नशेड़ी बच्चे मिल जाएँगे।ये घुमन्तु बच्चे कचरों के ढेर से अपनी जरूरत का सामान खोजते है।कबाड़ी के पास लोहा,प्लास्टिक,बेचकर मिले रुपए से नशा का सामान खरीदते है।पहले ,बांड फिक्स,और अब मैजिक फिक्स,इनके नशे का सामान है।कपड़े में इसकी कुछ बूंदे टपकाकर मुह से सांस खिंचकर इस नशा का ये उपयोग करते है।

पेट्रोलियम की गंध इन्हें भाती है किंतु दुष्प्रभाव से ये अनजान रहते हैं।बाईपास मार्ग, नवीन चौक रेलवे पटरियों व शहर के अन्य बस्तियों में ऐसे बच्चे मैले कुचैले,कपड़े पहने,कंधे पर बोरी लटकाए कचरों के ढेर के आसपास सहज ही नजर आते है।पूछने पर कहते हैनाज स्कूल नही गया ,माँ की तबियत खराब है तो दवाई के लिए पैसा कमाना है,कोई कहता है घर मे पैसा नही है तो माँ बाप ने कमा कर लाने के लिए बोले है।

कुछ इसी तरह के युवा होते किशोर नशा के आगोश में जाकर अपनी ऊर्जा नष्ट कर रहे है।कतिपय संभ्रांत परिवारों के युवाओं में ब्राउन शुगर जैसे महंगे नशे का जहर घोला जाने लगा है।गांजा,भांग,शराब,का नशा तो रग रग में बह रहा है।खांसी की दवा ,दर्द निवारक गोलियों का नशा के रूप में उपयोग किया जारहा है।

प्रतिबंधित दवाइयां की चोरी छिपे बिक्री भी हो रही है जो कुछ दुकानदार महंगे दर पर उपलब्ध कराते है।शहर में आधा दर्जन से अधिक ऐसे युवा सड़कों पर घूमते मिल जाएंगे जो लगातार गांजा,बांड फिक्स, सुलेशन,पी पी कर अपना मानशिक संतुलन खो बैठे है। कुल मिलाकर यह नशा बचपन से लेकर युवा होते किशोरों को गर्त में धकेल रहा है

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