तृणमूल ने 42 सीटें जीतने के लिए किया यज्ञ-

पश्चिम बंगाल की सभी 42 सीटों पर जीत हासिल करने का लक्ष्य लेकर लोकसभा चुनाव मैदान में उतरी तृणमूल कांग्रेस की ओर से हावड़ा में यज्ञ करवाया गया। मालूम हो कि 21 जुलाई की शहीद रैली में तृणमूल सुप्रीमो ममता ने सभी 42 सीटें जीतने के लक्ष्य के लिए उन्नीस बीजेपी फिनीश का नारा दिया था। दल की ओर से लक्ष्य हासिल करनेके लिए हर संभव कोशिशें की जा रही हैं। इसके मद्देनजर सबसे पहले सभी सीटों पर उम्मीदवारों का एलान करके चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है, जबकि दूसरे दलों की ओर से अभी तक उम्मीदवारों के नाम को लेकर विवाद चल रहा है।

तृणमूल की ओर से हावड़ा नगर निगम के 26 नंबर वार्ड में उमेश बनर्जी लेन के मैदान में नो होम कुंडस्थापित करके यज्ञ का आयोजन किया। इस भव्य आयोजन के लिए तारापीठ से पुरोहित को बुलाया गया था। बताया जाता है कि 60 किलो लकड़ियां, 8 किलो घी का यज्ञ में व्यवहार किया गया। महिलाओं की ओर से शंख बजाकर माहौल का वातावरण धार्मिक बनाया गया। यज्ञ स्थल पर सभी 42 उम्मीदवारों की तस्वीरें लगाई गई थी। इस मौके पर तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि बीते 7-8 साल के दौरान राज्य में विकास का जितना काम हुआ है, इसके लिए ही हमें सभी सीटों पर जीत मिलेगी।

● तृणमूल ने केंद्रीय सुरक्षा बलों पर मतदाताओं को धमकाने का लगाया आरोप

केंद्रीय सुरक्षा बल यहां आने के बाद घर-घर जाकर लोगों को धमका रहे हैं! तृणमूल कांग्रेस की ओर से सुरक्षा बलों पर पक्षपात का आरोप लगाया गया है। दक्षिण कोलकाता के नजरूल मंच में तृणमूल उम्मीदवार माला राय के समर्थन में कार्यकर्ता सम्मेलन में दल के हेवीवेट नेता पार्थ चटर्जी से लेकर फिरहाद हाकिम, सुब्रत बख्सी, सुब्रत मुखर्जी, शोभनदेव चट्टोपाध्याय जैसे नेता उपस्थित थे। इस मौके पर वक्ताओं ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका पर भारी नाराजगी प्रकट की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बल यहां पहुंचने के बाद ही घर-घर जाकर मतदाताओं को धमका रहें हैं।

पार्थ चटर्जी ने कहा कि कई टीवी चैनलों पर देखा जा रहा है कि वे धमका रहे हैं। यह सुरक्षा बल पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है। कश्मीर में भी इतने सुरक्षा बल नहीं भेजे गए हैं। वे लोग रूट मार्च कर सकते हैं, लेकिन रूट मार्च के बहाने जो कर रहे हैं उसे सहन नहीं किया जाएगा।

मेयर फिरहाद हकीम ने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बल रहे या नहीं रहें, इससे हमें कुछ फर्क नहीं पड़ता। इसके पहले 2014 में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने यहां आकर भय का वातावरण बनाया था। भाजपा ने सोचा था शायद हम हार जाएंगे लेकिन 34 सीटों पर हमें जीत मिली थी। तब भी केंद्रीय सुरक्षा बलों ने बहुत अत्याचार किया था। इसके बाद भी राज्य के लोगों ने ममता बनर्जी के पक्ष में जमकर मतदान किया। इसके बाद 2016 में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने मुझे ही मतदान केंद्र में नहीं घुसने दिया था। उन्होंने सवाल पूछा कि इतना पहले केंद्रीय सुरक्षा बल क्यों भेजे गए हैं? कश्मीर और जंगल महल में शांति लौटाने के लिए भी इतनी फोर्स नहीं भेजी गई। मेरा मानना है कि इसके पीछे भाजपा का राजनीतिक एजेंडा है। केंद्रीय सुरक्षा बलों के आने पर कोई आपत्ति नहीं हैं, लेकिन वे लोग जो कुछ कर रहे हैं वह सहनीय नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग से इस मामले में शिकायत की जा रही है कि क्यों इतना पहले केंद्रीय सुरक्षा बल भेजे गए हैं। दल की ओर से कहा गया है कि भाजपा को चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं, किसी तरह का संगठन नहीं है।

सुब्रत बख्सी ने कहा कि 2004 में एक चरण में मतदान हुआ था, तब तृणमूल कांग्रेस को एक लोकसभा सीट पर जीत मिली थी। जबकि 2009 में तीन चरण में मतदान हुआ और हमारी सीटों की संख्या बढ़कर 19 हो गई। इसके बाद 2014 में पांच चरण में मतदान हुआ था और हमारी सीटों की संख्या बढ़कर 34 हो गई। इस बार सात चरण में मतदान हो रहा है इसलिए 42 में 42 सीटों पर ही जीत मिलेगी।

● पुलिस-प्रशासन के मुताबिक बंगाल में 30 फीसद बूथ भी नहीं हैं संवेदनशील

पश्चिम बंगाल पुलिस और प्रशासन की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में विरोधियों के आरोप को रद्द किया गया है। इसके मुताबिक लोकसभा चुनाव के लिए राज्य में 30 फीसद से भी कम बूथ संवेदनशील हैं। इस बारे में रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी गई है। मालूम हो कि गत शनिवार को उप मुख्य चुनाव आयुक्त सुदीप जैन ने राज्य के सारे जिलों के डीएम और पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक की थी, उसमें इस बारे में ब्योरा पेश किया गया था। बताया जाता है कि आयोग ने अभी तक रिपोर्ट मंजूर नहीं की है। उप चुनाव आयुक्त ने उक्त बैठक में संवेदनशील बूथों के बारे में और अच्छी तरह से जांच का निर्देश दिया है।

मालूम हो कि आगामी लोकसभा चुनाव में राज्य के बूथों की संख्या करीब 79 हजार है। राजनीतिक तौर पर इस बारे में व्यापक हंगामा चल रहा है कि इन बूथों में कितने अति संवेदनशील और कितने संवेदनशील बूथ हैं। भाजपा की ओर से चुनाव आयोग से मांग की गई है कि राज्य के सभी बूथों को संवेदनशील घोषित किया जाए। कांग्रेस की ओर से भी ऐसी ही मांग की गई है। माकपा की ओर से मांग की गई है कि सभी मतदाता मतदान कर सकें, आयोग इसकी व्यवस्था करे।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की ओर से मांग का जोरदार विरोध करते हुए कहा गया है कि इस तरह की मांग करके राज्य का अपमान किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि राज्य की कानून व्यवस्था बहुत खराब है, जबकि वास्तविक हालात इसके उलट हैं। राज्य के इस अपमान के विरोध में महिला तृणमूल कांग्रेस ने महानगर में दो दिन का धरना भी दिया। तृणमूल समर्थक बुद्धिजीवियों की ओर से उप चुनाव आयुक्त से मिलकर इस बारे में एक ज्ञापन भी दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयुक्त ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि भाजपा की मांग के मुताबिक सभी बूथों को संवेदनशील घोषित किया जाएगा, लेकिन एसपी और डीएम से मामले की और विस्तार से समीक्षा करने के लिए कहा है। विरोधी दलों की ओर से संवेदनशील बूथों की मांग को लेकर सौंपी गई सूची को भी देखने के लिए कहा गया है। पुलिस प्रशासन मिलकर इस बारे में बूथों की शिनाख्त कर सकते हैं। बताया जाता है कि प्रशासन की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में मुश्किल से 27-28 फीसद बूथों को ही संवेदनशील माना गया है।

हालांकि चुनाव आयोग इस बारे में अंतिम फैसला करेगा कि किस-किस बूथ को संवेदनशील घोषित किया जाए। मतदान के चार दिन पहले इस बारे में अंतिम फैसला किया जाता है। संवेदनशील बूथों की शिनाख्त करने से पहले केंद्रीय खुफिया संस्था की रिपोर्ट के साथ ही राज्य में पहुंची केंद्रीय सुरक्षा बलों के कमांडेंट की रिपोर्ट भी देखी जाएगी। जिला प्रशासन और पुलिस के अलावा लोकसभा केंद्र के लिए पहुंचे साधारण और पुलिस पर्यवेक्षक की सलाह ली जाएगी।

मालूम हो कि आयोग ने पहले ही फैसला किया है कि सभी बूथों पर केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान तैनात रहेंगे। चुनाव के पहले ही 10 कंपनी केंद्रीय सुरक्षा बल पहुंच चुकी है और 35 कंपनियां जल्द ही आने वाली हैं।

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