अवास्तविक बहादुरी नहीं कर सकती देशवासियों का भला- प्रणब मुखर्जी(पूर्व राष्ट्रपति)

पूर्व राष्ट्रपति  प्रणब मुखर्जी ने वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर तंज कसा है। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में आज ऐसे नेताओं की जरूरत है जो लोगों की बढ़ती अपेक्षाओं को पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि ‘अवास्तविक बहादुरी’ न तो देश का नेतृत्व कर सकती है और न देशवासियों का भला। आपको बता दें कि प्रणब मुखर्जी सोमवार को एक कार्यक्रम में उद्योगपतियों को संबंधित कर रहे थे।

गरीब की चिंता –

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि देश को गरीबी मुक्त बनाने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है। यही नहीं उन्होंने देश में धन के असंतुलन भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि देश के एक प्रतिशत भारतीयों के पास कुल धन का 60 फीसदी हिस्सा है, जो काफी चिंताजनक है। प्रणब मुखर्जी ने उद्योगपतियों से लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद करने की भी अपील की।

       पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि यह वाकई चिंताजनक है कि देश के कुल धन का 66 प्रतिशत भाग केवल एक प्रतिशत आबादी के पास है। पूर्व राष्ट्रपति ने इन आंकड़ों को देश के लिए बोझ बताया। इस दौरान उन्होंने देश की वृद्धि को और अधिक समावेशी और समान होने की जरूरत पर भी बल दिया।

आपको बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक भारत दुनिया की 7वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जबकि संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 में मार्च 2019 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत होने का अनुमान है।

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