क्लब ने 28वां बसंत श्री सम्मान इंदु भूषण कोचगावे को दिया!

देहरादून में करनपुर स्थित क्लब कार्यालय में सामाजिक संस्था प्रगतिशील क्लब ने अपना वार्षिकोत्सव समारोह मनाया, जिसमें संस्था प्रत्येक वर्ष के भांति इस बार 28वां बसंत श्री सम्मान समारोह का भी आयोजन किया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार  ज्ञानेंद्र कुमार जी ने सॉल ओढ़ा कर श्री इंदु भूषण कोचगावे जी का सम्मान किया। वही संस्था के महासचिव  पीयूष भटनागर ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। और संस्था के गतिविधियों से सभी को अवगत कराया। वही इस मौके पर  डॉ. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, वाणीकांत पंकज, शिव मोहन सिंह, गोपालदत्त चौकियाल, रोहित कोचगवे, रोशन गैरोला, अधिवक्ता नरेंद्र सिंह नेगी, स्वप्निल सिन्हा सहित अन्य लोग मौजूद रहें।

वही इस कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि अवकाश प्राप्त जनरल (भारतीय सेना)  अश्वनी कुमार बक्शी ने अपने संबोधन में संस्था के कहा की सम्मान के सम्मान समारोह में जिस प्रकार से समाज से जुड़े हुए ऐसे लोगों का चयन किया जाता है जो अपने क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट कार्यो को लेकर औरों के लिए प्रेरणा स्रोत बनते हैं।

इस दौरान  कार्यक्रम की शुरुवात द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गाई वही कार्यक्रम में संस्था के साहित्यिक सचिव  जगदीश बावला ने  मंच संचालान किया। इस बार 28वां बसंत श्री सम्मान 83 वर्षीय सेवानिर्वित रेलवे विद्यालय के प्राचार्य  इंदु भूषण कोचगावे को  दिया गया।

साथ ही प्रगतिशील क्लब के अध्यक्ष ए. के. सक्सेना ने अपने संबोधन में बताया की संस्था विगत 47 वर्षों से कई विषयों पर सामाजिक कार्य कर रही है, वही उन्होंने कहा कि संस्था समाज के किसी एक प्रसिद्ध साहित्यकार, रचनाकार, कलाकार, कवि, पत्रकार एवं समाजसेवी को प्रत्येक वर्ष सम्मानित करती है। ऐसे में इस वर्ष बसंत श्री सम्मान से सम्मानित इंदु भूषण कोचगाव ने कार्यक्रम के दौरान संस्था द्वारा किए जा रहे सामाजिक गतिविधियों की सराहना की ।

जाने कौन है इंदु भूषण कोचगावे…इंदु भूषण कोचगावे का जन्म वर्ष 30जून 1939 को मुगलसराय में हुआ। आप रेलवे इंटर के प्रधानाचार्य पद से सेवानिर्वित हुए, उसके बाद 1999 से 2007 तक बीएड स्पेशल एजुकेशन के मुख्य समन्वयक रहें। इस अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने दिव्यांग जनों के लिए कई ऐतिहासिक कार्य किए। साथ ही उनकी तकरीबन 100 से अधिक दोहा संग्रह कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। वहीं उन्होंने विज्ञान परिचर्चा, सोच विचार और रत्नाकर जैसी कई प्रेरणादायक पुस्तकों में लिखें।

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