एक ‘पिता’ की चिंता की ऐसी भयावह सजा? 

हम रोज खबर सुनते हैं कि समाज में बेटियों पर बहुत अन्याय हो रहा…. पर जब बेटी ही अन्याय की सारी सीमाएं लांघ जाये तब क्या हो? सच कहूँ तो चाहे बेटी हो या बेटा अगर गुनाहगार है तो वह बेटी-बेटा, इंसान ना होकर सिर्फ़ हिंसक जानवर के समान हैं। 
हां आपने बिल्कुल सही पढ़ा, जयपुर मूल निवासी के साथ यही घटा है। जयपुर पुलिस  केअनुसार राजस्थान के Jaipur District के विराटनगर के पास मेढ़ गांव के मूल निवासी जयकुमार जो राजस्थान के रहने वाले थे और राजाजीनगर इलाके में उनकी कपड़ों की दुकान थी। उनकी 15 वर्षीय नाबालिग पुत्री जो दसवीं कक्षा में पढ़ती थी और आजकल के फिल्मी फर्जी प्यार में इतनी अंधी हो चुकी थी कि पिती ने गलत रास्ते पर जाने से रोका तो प्रेमी के साथ मिलकर पिता का ही गला रेत डाला।
पुलिस जांच से पता चला है कि जयकुमार की पुत्री Model बनना चाहती थी और उसने मॉडल, हीरोइन जैसी चकाचौंध भरी मॉर्डन ग्लैमरस लाईफ जीने की अनियंत्रित जिद्द के चलते उसने अपने संस्कारी परिवार को अंधेरे में रखकर गुमराह करके वो चुपचाप मुंबई चली गई जहां जाकर उसने स्टायलिस लुक के साथ फोटो शूट कराया। फिर वहां चार दिन तक रहकर उसने कई फोटो शूट कराए और फैशन शो में भाग भी लिया। उसने Mumbai से अपनी मां को फोन कर बताया कि वह मुंबई में है और पांच दिन बाद घर लौटेगी। इस बात की शिकायत मां ने बेटी के पिता से कर दी और यह जानकर पिता को धक्का लगा कि वह बिना बताये क्यों गयी। आजकल कैसे – कैसे हादसे हो जाते हैं? ये फिल्म वालों ने ग्लैमर  और नग्नता परोस कर हमारे बच्चों को गुमराह कर दिया है, यह उम्र पढ़ने की है। बाद में पिता जयकुमार को पुत्री की सहेलियोंं से पता चला कि वह तो अपने प्रेमी प्रवीण के साथ मुंबई गई थी, हमारे साथ नहीं । इस दौरान उसके साथ कोई भी सहेली नहीं गई थी।फिर सूत्रों की माने तो लड़की के मुंबई से वापस बेंगलूरु लौटने पर गुस्साए जयकुमार ने उसकी पिटाई की और उसका मोबाइल छीन लिया था। जयकुमार ने पुत्री की पिटाई करने के अलावा प्रवीण को भी पुत्री से दूर रहने की चेतावनी दी थी। उस समय प्रवीण ने जयकुमार को अभद्रता की थी और सबक सिखाने की धमकी भी दी थी। पुलिस ने यह भी बताया कि स्नातक प्रथम वर्ष का छात्र प्रवीण राजाजीनगर तीसरे ब्लाक का निवासी है। उसके पिता एक निजी कंपनी के कर्मचारी थे।कुछ महीने पूर्व उसके पिता समेत कई कर्मचारियों को काम से निकाल दिया था। सेटलमेंट के रूप में लड़के के पिता को कुछ लाख रुपए मिले थे।इस राशि को उन्होंने बैंक में प्रवीण कुमार के नाम पर जमा किए और इससे मिलने वाले ब्याज से परिवार का गुजारा चलता था। दंपती का प्रवीण ही इकलौता पुत्र है जिसनेेे अपने माता-पिता व परिवार की हालत की अनदेखी करते हुए लड़की यानि प्रेमिका के पिता से अपनी बेइज्जती का बदला लेने की प्रबल भावना में लिये प्रेमिका को अकेले चुपचाप मुम्बई में ले जाकर मौज मस्ती में पैसे उड़ाये और दोनों ने मिलकर साजिस रचने की सोची।
इस बीच मौका पाकर एक शाम जयकुमार(पिता) की पत्नी और उनका बेटा पुडुचेरी चले गए और घर में सिर्फ जयकुमार और उनकी बेटी ही थी। घर में पिता के अकेले होने का फायदा उठाकर उस कलयुगी बेटी ने अपने पिता को किसी पेय चाय आदि पदार्थ में नींद की दवा मिलाकर पिला दी, जिससे वे बेहोश हो गए। बाद में उस कलयुगी बेटी व उसके प्रेमी प्रवीण ने मिलकर जयकुमार(पिता) के शरीर को चाकू से गोद डाला और अपराध का सिलसिला यहीं नहीं रुका। दोनों 41 साल के जयकुमार के शव को घसीट कर बाथरूम में ले गए और हत्या के सबूत मिटाने के इरादे सेे जयकुमार(पिता) के खून से सने कपड़ों को वॉशिंग मशीन में धोने के बाद कमरे में फैला खून भी साफ किया। बाद में शव को बाथरूम में ले गए और पेट्रोल छिड़कर आग लगा दी। बाद में लड़की ने यह कहते हुए  शोर मचा दिया  कि उसके पिता बाथरूम में नहाने गए थे और अचानक आग से जल गए।जब पड़ोसियों ने लगातार घर से धुंआ निकलता देखा तो उन्होंने पुलिस और दमकल विभाग को इसकी जानकारी दी। जब पुलिस और दमकल विभाग के लोग घर के भीतर घुसे तो वहां जय कुमार का अधजला शव पड़ा था और उस पर चाकू से कई वार किए जाने के दस घाव थे। पूछताछ करने पर लड़की और उसके प्रेमी ने विरोधाभासी बयान दिए। जोर डालकर पूछने पर दोनों ने अपराध कुबूल कर लिया। 
लड़की ने बताया कि उसका पिता उसके प्रेम प्रसंग से गुस्से में था। हाल ही में वह अपने प्रेमी के साथ एक मॉल में गयी थी । बाप ने प्रेमी से जवाब तलब किया तो प्रेमी ने धमकी देते हुए कहा तुझे सबक सिखायेगें? लड़़की को प्रेमी की बेइज्जती इस कदर बुरी लगी कि लड़की और प्रेमी ने मिलकर लड़की ने अपने पिता को ही बड़ी ही बेरहमी से मौत के घाट उतारने की भयानक साजिश रच डाली और अंजाम भी दे दिया ।पुलिस ने इन दोनों अपराधियों को जय कुमार जैन के कत्ल जैसे संगीन जुर्म के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। 
मैं तो खुलकर कहतीं हूं कि आजकल की फिल्मों ने हम आप से टिकट के पैसों से सिर्फ़ हम आपकी संस्कृति को चोटिल किया है कुठाराघात किया यानि हमारे देश की युवा पीढ़ी को पथभ्रष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी हैं.. और आजकल के अमर्यादित गानों ने रही बची कसर पूरी कर दी है. जिनपर आजकल के अधिकतर स्टूडेंट्स, युवा पीढ़ी फिल्मों की नकल से नाईट पार्टियों में शराब पीते धुत पाये जाते हैं। 
पता नहीं फिल्म इंडस्ट्री में कुछ लोग किस षड्यंत्र के तहत ऐसी दो कोड़ी की बेहूदा फिल्में बनाते हैं और सैंसर बोर्ड है या कैंसर बोर्ड जो गंदगी की नजरंदाजी में विश्व रिकॉर्ड प्राप्त लगता है। दूसरी तरफ़ मोबाईल और सोसलमीडिया की अजीबोगरीब दुनिया पता ही नहीं चलता कौन क्या है और मोबाइल वाला फेक लव शुरू हो जाता है और किसी व्यक्ति से दुश्मनी के तहत वो उसकी लड़की या लड़के को निशाना बनाकर अपनी सोची समझी रणनीति के तहत अपने घातक मंसूबों को अंजाम दे देते हैं क्योंकि जरा सोचिए! कि प्यार अपने पिता की हत्या करा दे, माँ का सुहाग छीन ले, भाई को तड़पा कर रख दे, पूरे समाज को नीचा देखने पर मजबूर कर दे.. बाद में तुम्हें जेल में कुटाई झेलनी पड़े… क्या यह प्यार हो सकता है? 
मैं तो स्पष्ट शब्दों में कहतीं हूँ कि नाबालिग बच्चों के मोबाइल हर माता-पिता को उन्हें प्यार से समझाते हुए चैक करने चाहिए क्योंकि देशविरोधी ताकते इन्हीं बच्चों की ताक में रहती हैं और उन्हें खूबसूरत लड़की की आईडी बनाकर आतंकी संगठनों तक से जोड़ने की योजना पर काम करतीं हैं। आपने देखा ही होगा ब्लू व्हेल गेम के चलते या षड्यंत्र के तहत विश्व के अनेकों बच्चों की जानें चलीं गयीं ओर नया मोबाईल गेम पब जी से ना जाने कितने ही नाबालिग बच्चों की पढ़ाई ही ठप कर दी है और कई मौते भी हो चुकी हैं। केवल गर्लफ्रेंड ब्यायफैंड के साथ दिनभर मोबाईल गेम खेलना बाकी समय मौजमस्ती करना, सच तो  यह है कि विदेशी ताकतें अपनी संस्कृति को यहां के युवाओं पर उडेलकर आज भी हम सब पर राज कर रहीं है। 
अब, एक बात ध्यान से सुनो नाबालिग युवाओं! कि जिन माता-पिता, गुरूओं और समाज ने तुम्हें ज्ञान दिया सम्मान दिया, अगर आप उनका नाम आगें ना बढ़ा सको तो गिराने का भी हक तुम्हें बिल्कुल नहीं है। जो लोग इन सबके विश्वास को कुचल कर जीते हैं तो यकीन मानिए वो लोग कभी भी खुश और संतुष्ट नहीं रहते।वो लोग खुश होने का सिर्फ़ दिखावा करते हैं जिससे दो चार को और अपनी ही तरह गलत मार्ग पर धकेल दें। यह गुपचुप मुम्बई ले जाने वाले लड़के ने यह नहीं सोचा कि ब्याज के पैसे से माता-पिता किस तरह गुजरबसर कर रहे हैं..  माता-पिता की चिंता छोड़  सिर्फ़ फिल्मी यानी झूठी जिंदगी की चाह…लड़की घुमाना, मजे लेना और पैसों की बर्बादी करना। क्या कलयुगी औलाद, तुझे तेरे माता-पिता ने इसी दिन के लिए पैदा किया था कि वह खूनी के माता-पिता कहलायें? वो भगवान! गॉड  तुम्हें प्यार में हत्या, बच्चे पैदा करने के लिए ही जन्म देता, यहां भेजता है क्या? अरे! वो भी उम्मीद करता है कि मेरी बनायी संतान इंसान, मेरी रची पृथ्वी की रक्षा करे.. प्रकृति का सम्मान करे, मानवता के काम करे पर तुम लोगों को विदेशी संस्कृति का आकर्षण चरम पर है? इसी अधर्मी आकर्षण के चलते वह कलयुगी लड़की चुपचाप, उस कलयुगी लड़के के साथ मुम्बई भाग गयी जरा सोचो! वह रेप करता या इसे कहीं बेच देता या वहां मानव तस्करी में इसके अंगों को निकाल लिया जाता तो कौन जिम्मेदार होता? बस यही तो चिंता की उस ‘पिता’ ने जिसकी ऐसी भयावह सजा? सोचने पर विवश कर देती है…….! 
मैें कड़े शब्दों में कहतीं हूं कि इन दोनों दुष्टों को नाबालिग समझकर बिल्कुल छोड़ा ना जाये और जिस तरह एक संस्कारी पिता की हत्या हुई उससे भी ज्यादा बुरी तरह इन दोनों कलयुगी औलादों की कुटाई हो और बेहरहमी से किये इस संगीन जुर्म हत्या के आरोपियों को सरेआम फांसी हो और प्रशासन द्वारा उस कुटाई व फांसी का वीडियो वायरल किया जाये जिससे अपराधी अपराध करने से पहले सौ बार सोचें। अंत में यही कहूंगी कि हमें हमारी भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों की रक्षा हेतु  मिलकर प्रयास करने होगें।
इस भयावह घटना पर जयपुर पुलिस, विनोद सिंह बणगुर्जर जी ने सच की दस्तक को बताया और अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि माता-पिता, अध्यापकों को भी बच्चों से सामंजस्य स्थापित करना होगा और मोबाईल, सोसलमीडिया व प्रेम प्रसंग से हुए अपराधों के प्रति उन्हें सजग करना चाहिए। टीम सच की दस्तक जयपुर पुलिस की मुस्तैदी का शुक्रिया करती है।
-ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना
न्यूज ऐडीटर सच की दस्तक राष्ट्रीय मासिक पत्रिका 

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