जलाभिषेक व आरती के साथ बाबा कीनाराम जन्मोत्सव शुभारम्भ-

चन्दौली से जितेंद्र मिश्रा की रिपोर्ट-

अघोरेश्वर संत शिरोमणी बाबा कीनाराम की तपोस्थली व कर्मभूमी रामगढ़ में बृहस्पतिवार की पहली निशा सूर्योदय की किरणों के साथ अल सुबह कावरियों द्वारा जलाभिषेक के साथ तीन द्विवसीय बाबा कीनाराम जन्मोत्सव का आगाज हुआ। भगवान भाष्कर के उदय होते ही रामगढ़ मठ में ढ़ोल, नगाढ़े, डमरूओं, घ्ांट, घड़ियाल के नगाड़े से पूरा मठ गूज उठा। हजारों श्रद्धालू भक्तों द्वारा बाबा कीनाराम के गगनभेदी जयकारे लगाये गये। तद्परान्त महिलाओं द्वारा सोहर गीत व आरती के साथ बाबा कीनाराम की नैनाभिराम झाकी प्रस्तुत की गयी।

श्रद्धालुओं ने बाबा कीनाराम के दरवार में मत्था टेक पूजन-अर्चन कर मंगलमयी जीवन की कामना की। बृहस्पतिवार को प्रातः महिलाओें क्षरा सोहर गीत के बाद भक्तों द्वारा रामायण पाठ प्रस्तुती की गयी। वही अपरान्ह में बाहर से आये कलाकारां द्वारा भजन गीतां का आयोजन कर समा बाधी गयी। इतना ही नही बल्कि स्कूली छात्र छात्राओं द्वारा मनोहर झाकी प्रस्तुत कर भजन, कजली, सोहर गीतों का आयोजन कर उपस्थित अपार जनसमूह को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं द्वारा जमकर सोहर गीत के बीच-बीच में हर-हर महादेव व बाबा कीनाराम के जयकारे की गूंज उठती रही।

बाबा धाम में दर्शन हेतु श्रद्धालुओं की लम्बी कतार लगी थी और श्रद्धालुओं के मन में बाबा कीनाराम के दर्शन की आशा बधी रही जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे भक्तां की अपार भीड़ बढ़ती गयी। जिसे वालियन्टरां को नियंत्रण करने में ंकाफी मशक्कत करना पड़ा लेकिन सबसे मजेदार बात तो यह थी कि जैसे ही बाबा कीनाराम के जयकारे लगते थे वैसे ही भीड़ अपने आप नियंत्रित हो जा रही है। जहां सभी भक्त कतारबद्ध होकर अपने आप बाबा के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण करते हुए अपने गनतब्य को लौटते रहे।

भव्य संगीत की बही बयार-

बाबा कीनाराम के तीन द्विवसीय समारोह के पहले दिन अपरान्ह में बाबा धाम पर भव्य संगीत, भक्तिगीत, भजन, लोकगीत कलाकारों ने प्रस्तुति देकर दर्शकां को खूब लुभाते हुए बाहबाही लूटी। कलाकारों द्वारा भजन व बाबा कीनाराम पर आधारित गीत की प्रस्तुति पेश कर सबको बाबा कीनाराम मय बना दिया और जमकर बाहबाही लूटी।

सूबे के मुखिया ने बाबा कीनाराम के चरणों में टेका मत्था-

अघोरश्वर संत शिरोमणी बाबा कीनाराम की जन्मस्थली, कर्मस्थली व तपस्थली पर बृहस्पतिवार की अपरान्ह चार बजे सूबे के मुखिया आदित्य नाथ योगी ने पहुंचकर बाबा के तपस्थली, गद्दी व उनके प्रतिमा पर माल्यर्पण कर दर्शन पूजन किये। तद्पश्चात उन्होन बाबा कीनाराम के जीवन पर विस्तृत रूप से विचार व्यक्त किया।

बाबा कीनाराम के आर्दशों तथा समाज मे किए गये सामाजिक उत्थान के प्रयास का विस्तृत वर्णन किया। बाबा कीनाराम ने 420वर्षो पूर्व समाज में अनेक प्रकार की भ्रान्तियां, अस्पृश्यता, रूढ़वादिता फैली थी। उस समय मुगल शासक का राज्य था चारो तरफ त्राहीमाम मचा हुआ तब बाबा कीनाराम ने जन्म लेकर जनमास की सेवा की और मुगल शासकों के सबक सिखाया था ।

वही उन्होनेें बताया कि घोरो के घोर अघोरेश्वर बाबा कीनाराम की जन्मस्थली, तपस्थली व कर्मस्थली रामगढ़ की भूमी धन्य है यहा कि मिट्टी के एक-एक कण में भगवान शिव का वास है। मैं परम पुन्य पावन भूमी को कोटी-कोटी प्रमाण करता हूँ। 

यहा मैं कई बार आने का प्रयास किया लेकिन जब तक बाबा कीनाराम की इच्छा नही तब तक नही आ पाया और जब इनकी इच्छा हुई 420वें जन्ममोत्सव पर हमें जबरन खीच लाये। बाबा अपने आदर्शो, विचारां, शक्तियों व अनेक चमत्कारिक क्रियाओं से समाज को एक नयी दिशा व दशा देने का कार्य किया।

यह देश संत सन्यासियां, महर्षियां, देवर्षियों की सानिध्य में पलता बढ़ता रहा जब-जब भारत पर कोई भी आपत्ति आती रही तब-तब ये महान विभूतियों की आत्माएं हमारा मार्गदर्शन कर भारत की एकात्मकता बनाये रखने में मददगार रही है।

बाबा कीनाराम के 11वें अवतरण के रूप में बाबा सिद्धार्थ गौतम जी बाबा स्वरूप ही गद्दी सम्भाले हुए आज यह मुझे सौभाग्य हुआ है कि मैं उनका दर्शन पाकर विभोर हो गया। वही बाबा गोरक्षनाथ पर भी विस्तृत प्रकास डालते हुए कहा कि गिरनार में बाबा गोरक्ष नाथ, बाबा कीनाराम, और दत्तात्रेय की तीन चेटियां आज भी विद्यमान है।

बाबा कीनाराम की कथा – 

 

अघोर – का ताल्लुक सृष्टि की उत्पत्ति से ही है ! ये परम्परा क्षेत्र-धर्म के मुताबिक़ अवधूत, मलंग, परमहंस, औलिया, अघोरेश्वर, औघड़ जैसे कई नामों से प्रचलित है ! यानि धर्म-विशेष से इसका कोई ताल्लुक़ नहीं होता, भी धर्म-सम्प्रदाय का साधक इस अवस्था में अवस्थित हो सकता है ! प्राचीन अघोर के वर्तमान स्वरुप का जनक, 16 वीं शताब्दी के महान अघोर संत अघोराचार्य महाराज श्री बाबा कीनाराम जी को माना जाता है ! 6-7वीं शताब्दी से सुसुप्तावस्था में पड़ी, अघोर परम्परा को बाबा कीनाराम जी ने पुनर्जागृत किया ! सन 1601 में, तत्कालीन वाराणसी जिले की चंदौली तहसील (जो अब जिला बन चूका है) के रामगढ़ नामक स्थान में जन्में अघोराचार्य महाराज श्री बाबा कीनाराम जी उच्च कोटी के महान संत रहे ! अपने 170 साल के नश्वर शरीर में रहते हुए , उन्होनें कई असहाय, दुर्बल, पीड़ित लोगों को राहत पहुंचाई, व्यापक स्तर पर समाज-सेवा (जो अघोर परम्परा का मूल-धर्म है ) की ! कई मुग़ल शाषक भी बाबा के आशीर्वाद के भागी बने ! बाबा कीनाराम जी अत्यंत दयालु संत रहे , पर बेहद अपमानित अवस्था में कुपित भी हो जाते रहे ! कहा जाता है कि तत्कालीन काशी नरेश, राजा चेत सिंह, ने बाबा का बुरी तरह अपमान कर दिया ! उद्धेलित हो, बाबा ने उन्हें श्राप दिया कि – “जाओ आज से तुम्हारे महल में कबूतर बीट करेंगें, तुम्हे महल छोड़ कर भागना पड़ेगा और तुम पुत्र-हीन रहोगे” ! उस वक़्त सदानंद (उत्तर-प्रदेश के द्वितीय मुख्यमंत्री डा.संपूर्णानंद के पूर्वज), जो राजा के निजी सचिव थे, ने बाबा से इस कृत्य के लिए माफी माँगी ! बाबा ने कहा कि- “जाओ जब तक तुम्हारे नाम के साथ आनंद लगता रहेगा , तुम फलो-फुलोगे” ! इतिहास गवाह है कि ये घटनाएं घटी और सन 2000 तक काशी नरेश के यहाँ गोद ले-ले कर राजशाही चलती रही ! 11वीं गद्दी पर बाबा कीनाराम जी पुनरागमन के पश्चात, काशी राजवंश श्राप-मुक्त हो सका ! घोर-वैज्ञानिक युग में ये असाधारण आध्यात्मिक घटना थी , मगर बहुत काम लोगों का ध्यान इधर गया !


1770 इसवी में 170 साल की अवस्था में बाबा ने इस उद्घोष के साथ समाधि ली थी -कि- “इस पीठ की ग्यारहवीं गद्दी (11 वें पीठाधीश्वर) पर, मैं बाल-रूप में पुनः आऊंगा और तब इस स्थान सहित सम्पूर्ण जगत का जीर्णोद्धार होगा ” !

वर्तमान, 11 वें, पीठाधीश्वर 44 वर्षीय, अघोराचार्य महाराज श्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी के बारे में विद्वान् जनों और शोधकर्ताओं का स्पष्ट मानना है कि – 1770 में , अपनी समाधि के वक़्त बाबा कीनाराम जी ने जो उदघोष (इस पीठ की ग्यारहवीं गद्दी ,11 वें पीठाधीश्वर के तौर, पर मैं बाल-रूप में पुनः आऊंगा) किया था – वो पूरा हुआ ! गौरतलब है कि वर्तमान पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराज श्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी, मात्र 9 वर्ष के अवस्था (10 फरवरी 1978) में इस महान पीठ के पीठाधीश्वर बने ! एक बालक और सर्वोच्च अध्यात्मिक गद्दी का मालिक ! ये अध्यात्मिक जगत की बड़ी और आश्चर्य में डाल देने वाली उन बड़ी घटनाओं में से एक है, जिस पर ध्यान किसी-किसी का ही गया ! अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी के रूप में, अघोराचार्य बाबा कीनाराम जी ने , पुनरागमन कर अपने उदघोष की पुष्टि कर दी है और सन 2000 में काशी नरेश श्राप मुक्त भी हो चुके हैं (इसकी पुष्टि भी आप , इस चरम वैज्ञानिक युग में, कर सकते हैं ) ! इसके अलावा इस स्थान का पूर्ण जीर्णोद्धार, आज, ज़ोरों पर है (आप जाकर इस बात की पुष्टि खुद कर सकते हैं ) ! साथ ही सम्पूर्ण जगत की व्यवस्था करवट , बड़ी तेज़ी से, ले रही है !


इसमें कोई दो-राय नहीं कि कई अध्यात्मिक परम्पराओं को संजोये हुआ हिन्दुस्तान, सभ्यता और संस्कृति के लिहाज़ से, शानदार मुल्क है ! अघोर उन अध्यात्मिक परम्पराओं में से एक है ! इस परम्परा (अघोर ) की विचित्र दास्ताँ है ! चमत्कार, रिद्धि-सिद्धी, कौतुहल , सेवा ! पर यकीनन एक बात दावे के साथ कही जा सकती है कि- पूरी दुनिया में अघोरी एक्के-दुक्के ही हैं , और जो हैं वो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को अपनी मुट्ठी में रख घूम रहे हैं ! हां ! उनके बेहद गोपनीय क्रिया-कलापों को जान पाना नामुकिन है ! थोड़ा-बहुत अनुभव, लगातार शोध और संपर्क के ज़रिये हो सकता है ! अन्य सभी (जो खुद को अघोरी या तंत्र विद्या का प्रकांड विद्वान् समझते हैं या घोषित हैं ), इस पथ पर चलने वाले पथिक मात्र हैं ! रिद्धि-सिद्धी , चमत्कार का खुलेआम प्रदर्शन करने वाले अघोरी नहीं होते और ना ही विकृति और भय के पोषक होते हैं ! वर्तमान में, अघोर और दुनिया भर के अघोरी पथिकों के मुखिया अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी को देख कर आप इस बात की पुष्टि कर सकते हैं ! एक आम युवक जैसे दिखने वाले, सरल-सौम्य-सहज और दया की मूर्ति अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी का दर्शन करने और अपने कष्टों का निवारण करने दुनिया हेतु भर से हर वर्ग के लोग बड़ी संख्या में आते हैं ! अध्यात्मिक शक्तियों को परदे में रख अंजाम और विज्ञान को बेहद सम्मान देने वाले, अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी- मानवता का सन्देश और समाज-सेवा के अलावा किसी बात को नहीं कहते ! चमत्कार की बात से ही वो चिढ़ जाते हैं ! शिक्षा, साहित्य और आयुर्वेदिक दवाओं के विस्तार के ज़रिये बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी , विज्ञान को सबसे उपरी पायदान पर रख कर अंध-विश्वास को किनारे कर रहे हैं ! बीमार को डॉक्टर के पास जाने की सलाह देते हैं और विद्यार्थियों को नए-नए शोध और विज्ञान की नयी जानकारियाँ जुटाने के लिए प्रेरित करते हैं !
तंत्र को बहुधा , अघोर माने वालों के लिए जानना बहुत ज़रूरी है कि – तंत्र, अघोर जैसे वट-वृक्ष की एक टहनी मात्र है ! अघोर (अघोरी) हमेशा दाता की भूमिका में होता है और तंत्र याचक की भूमिका में !

हाँ अघोरी वही ,जो आदेश मात्र से विधि के विधान को बदल दे ! विधि का विधान बदल देना सिवाय उपरवाले के , किसी और के बूते की बात नहीं ! इसीलिए ये बखूबी कहा जा सकता है कि – स्वयंभू अघोरी तो बहुत हैं पर सच्चा अघोरी सिर्फ एक या दो हैं ! बकौल विश्वनाथ प्रसाद सिंह अष्टाना (अपने जीवन के 60 साल अघोर परम्परा को समझने के लिए गुज़ारने वाले और अघोर परम्परा से जुड़ी विश्व-विख्यात किताबों के प्रसिद्द लेखक )- “अघोरी मदारी की तरह घूम-घूम तमाशा नहीं दिखाता और ना ही खुले-आम चमत्कारों को सरंक्षण देता है, पाखण्ड को लाताड़ता है और अंधविश्वास से दूरी बनाए रखने का यथा-संभव प्रयास करता है , चमत्कार के आकांक्षियों को निराश करता है, समाज की सेवा ही उसका एक-मात्र उद्देश्य होता है ! ये और बात है कि – समय-काल और परिस्थिति , सहज ही कई अविश्नीय घटनाओं के साक्षी स्वयं बन जाते हैं, जिन्हें आम-जन अदभुत चमत्कार के संज्ञा देते हैं ” ! अघोरी समय-काल और प्रकृति के बनाए नियमों का उल्लंघन बेहद कठिन परिस्थितियों में ही करता है ! समाज में मौजूद सु-पात्रों के ज़रिये सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के व्यवस्था को क्रियान्वित करता है , ! और यह गोपनीयता का इतना घना आवरण रहता है -कि-ये बात समाज के सु-पात्रों को भी नहीं मालूम चलती ! पर अघोरी जो कहता है , वो घटता है ! कहा भी गया है- जो ना करे राम , वो करे कीनाराम !

वहीं कार्यक्रम के अन्त में बाबा सिद्धार्थ गौतम रामजी ने गोरखपुर के गोरक्षनाथ मठाधीश्वर व सूबे के मुखिया को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। दुसरी तरफ मुख्यमंत्री आदित्याथ येगी चन्दन शहीद के माता-पिता को अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया।

वही उन्होनें पर्यटन मंत्री नीलकण्ठ तिवारी से कहा कि इस पावन भूमी को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाय ताकि यहा बिरासत वर्षो पर्यन्त बनी रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक अजित सिंह, धनन्जय सिंह, जय प्रकाश सिह, जयप्रकाश पाण्डेय सहित क्षेत्र सम्भ्रान्त मौजूद रहे।

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