नीति आयोग –  भारत के मेथनॉल खाना पकाने योग्य ईंधन कार्यक्रम का शुभारंभ – 

असम न्यूज –

नामरूप, असम: 5 अक्टूबर, 2018 का यह दिन भारत, पूर्वोत्तर और एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी असम पेट्रो-रसायन के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, जिस दिन एशिया का पहला कनस्तर आधारित और भारत का पहला “मेथनॉल खाना पकाने योग्य ईंधन कार्यक्रम” आरम्भ किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन नामरूप में असम पेट्रो-रसायन परिसर में नीति आयोग के सदस्य और मेथनॉल सर्वोच्च समिति के अध्यक्ष डॉ. वी.के सारस्वत ने किया।

असम पेट्रो कॉम्प्लेक्स के अंदर 500 घर पहले पायलट परियोजना होंगे, जिसकी संख्या उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, गोवा और कर्नाटक में बढकर 40,000 परिवारों तक पहुँच जाएगी। यह परियोजना हमारे प्रधानमंत्री के कच्चे तेल के आयात को कम करने और स्वच्छ, आयात विकल्प, लागत प्रभावी और प्रदूषण मुक्त खाना पकाने के माध्यम को प्रदान करने के प्रयासों के दृष्टिकोण का एक स्वाभाविक विस्तार है। असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड पिछले 30 सालों से मेथनॉल का निर्माण कर रही है और दिसंबर 2019 तक अपने 100 टीपीडी मेथनॉल प्लांट को 600 टीपीडी में अपग्रेड करने की प्रक्रिया में है।

परिचालन में सुरक्षित कनस्तर आधारित खाना पकाने के स्टोव स्वीडन की प्रौद्योगिकी से लिए गये हैं और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से अगले 18 महीनों में भारत में बड़े पैमाने पर खाना पकाने के स्टोव विनिर्माण संयंत्र आएंगे जिनसे प्रतिवर्ष 10 लाख कूक स्टोव और 1 करोड़ कनस्तर का उत्पादन होगा। यह तकनीक बहुत ही अद्वितीय है। यह मेथनॉल को बेहद सुरक्षित रूप से परिचालित करती है, जिसमें किसी रेगुलेटर या किसी भी पाइपिंग सिस्टम की आवश्यकता नहीं होती है।

खाना पकाने का यह माध्यम प्रत्यक्ष रूप से एलपीजी, केरोसिन, लकड़ी, चारकोल और खाना पकाने के लिए किसी भी अन्य ईंधन की जगह ले सकता है। गैसीय रूप, मेथनॉल – डीएमई, एलपीजी के साथ 20% के अनुपात में मिश्रित किया जा सकता है। अगले वर्ष तक एलपीजी-डीएमई मिश्रण कार्यक्रम के देश में आरम्भ होने की उम्मीद है।

1.2 लीटर कनस्तर दो बर्नर पर पूरे पांच घंटे तक चल सकता है और रैक के रूप में 8 ऐसा कनस्तर तीन व्यक्तियों के एक परिवार के लिए एक महीने तक चल सकता है। मेथनॉल के लिए एलपीजी के एक सिलेंडर के बराबर की लागत 650 रुपये रुपये है जबकि एलपीजी के एक सिलेंडर की लागत 850 प्रति सिलेंडर हैं जिसके परिणामस्वरूप कम से कम 20% बचत होती है। उदाहरण के लिए, मणिपुर में एलपीजी की ढलाई की लागत रु 200 है, जबकि मेथनॉल के लिए इसकी लागत 12रुपये होगी। यह घरेलू ईंधन और वाणिज्यिक, संस्थागत और रेस्तरां के लिए ईंधन के रूप में एक उत्कृष्ट विकल्प प्रदान करता है। चीन सालाना खाना पकाने योग्य  ईंधन के रूप में मेथनॉल के 4 एमएमटीए का उपयोग करता है।

 

 

 

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