गृहस्थ जीवन का पालन सुख प्राप्ति की कुंजी

सच की दस्तक डेस्क चन्दौली

मुगलसराय स्थित सिंचाई विभाग कॉलोनी के प्रांगण में संगीतमय प्रज्ञा पुराण कथा के दूसरे दिन पंडित संदीप पांडेय ने गृहस्थ जीवन पर चर्चा की।
शान्तिकुंज हरिद्वार से पधारे कथावाचक संदीप पांडेय ने प्रज्ञा पुराण कथा कहते हुए कहा कि गृहस्थ जीवन एक तपोवन है । गृहस्थ जीवन के दायित्वों का पालन करने से त्रिलोक में स्वर्ग में परलोक में सभी जगह सुख की प्राप्ति होती है । गृहस्थ जीवन में आने वाले दायित्वों का इमानदारी पूर्वक पालन करना चाहिए जो व्यक्ति दायित्वों का पालन करते है वे ही धार्मिक कहलाते है ।
उनके यहां भगवान स्वयं जन्म लेते हैं ।त्रेता युग में भगवान राम का जन्म राजा दशरथ के घर हुआ था। महाराजा दशरथ ने गृहस्थ जीवन का अच्छे से पालन किया था जिस के प्रतिफल के रूप में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था।
गृहस्थ जीवन पर आगे चर्चा करते हुए कथावाचक ने कहा कि जो संस्कार इनमें आते हैं उनका पालन करना चाहिए ।जैसे नाम करण संस्कार ,अन्नप्राशन संस्कार ,मुंडन संस्कार ,यगोपवित संस्कार विवाह संस्कार आदि इन सब संस्कारों का जो व्यक्ति अच्छे से पालन करता है उनमें व्यक्तित्व का विकास होता है अर्थात व्यक्तित्व निर्माण होता है । परिवार को उन्होंने अपनी कथा के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि गृहस्थ में मुखिया के लिए यह प्रयोगशाला के रूप में आयोजित किया जाना चाहिए। साथ मे इसे पाठशाला के रूप में इसे अपनाना चाहिए ।जो बड़े हैं उनका आदर सत्कार करना चाहिए और उनके द्वारा दिए गए कार्यों को पूरा करना चाहिए ।जिससे जो प्रयोगशाला बनी है उसका रिजल्ट अच्छा आ सके। प्रज्ञा पुराण कथा के दौरान मुख्य रूप से उदय नारायण उपाध्याय संगीता प्रदीप सरिता सिंह मीना उपाध्याय रीता तिवारी मीरा मंडल जी मनोज उपाध्याय आदि शामिल रहे।

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