शरद पूर्णिमा: 60 साल बाद शनि-गुरु का दुर्लभ संयोग, जानें किस राशि पर पड़ेगा क्या असर

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है। आज 13 अक्टूबर, रविवार को शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन रात को चंद्रमा अमृत बरसता है। इस शरद पूर्णिमा पर एक अद्भुत संयोग बन रहा है। ऐसा योग 60 साल पहले 16 अक्टूबर 1959 में बना था। शनि और गुरु के इस संयोग का अच्छा बुरा असर सभी 12 राशियों पर पड़ने वाला है।

आइए जानते हैं किस राशि पर पड़ेगा क्या प्रभाव।

मेष-
आज संयम से काम करें। किसी से बेवजह उलझने का प्रयास न करें। ऐसा करने से आप अपने आस-पास नकारात्मकता को फैलाएंगे। जिसकी वजह से लोग आपके अच्छे सुझावों को भी हल्के में लेंगे।

वृषभ-
आज का दिन आपके लिए अच्छा रहने वाला है। निर्भिकता से अपना कार्य पूरा करेंगे, कार्य को पूरा करने के लिए स्वयं का अनुभव काम आएगा।

मिथुन-
शारीरिक और मानसिक सेहत बनी रहेगी। प्रतियोगिताओं के परिणामों में बेहतर रहेंगे। व्यवासायिक प्रतिस्पर्धा में भी सफल होंगे। 

कर्क-
उधारी में डूबा हुआ धन मिल सकता है। कार्य में सफलता मिलेगी लेकिन शारीरिक कमजोरी महसूस कर सकते हैं।

सिंह-
परिस्थितियां ऐसी होंगी कि क्रोध आ सकता है लेकिन खुद को नियंत्रण में रखने से शत्रुओं पर विजय हासिल करेंगे। 

कन्या-
अपेक्षाकृत परिणाम नहीं मिलने से निराशा हो सकती है। निराशा को खुद पर हावी न होने दें। भविष्य में सफलता मिल सकती है।

तुला-
संतान के लिए बेहतर सुविधाओं की व्यवस्था करने में कामयाब रहेंगे। वाहन का प्रयोग सावधानी से करें। 

वृश्चिक-
आज के दिन सफलता के साथ नाकामी भी मिल सकती है। संयमित रहें, भाग्य को न कोसने में समय खराब न करें। 

धनु-
दूरगामी लाभ देने वाली योजनाओं से सचेत रहें और  विरोधियों से भी सतर्कता बनाए रखें। 

मकर-
अपेक्षाकृत परिणाम मिलने में संदेह है। कारोबार में व्याकुलता बनी रहेगी और अनावश्यक परेशानी बढ़ सकती है।

कुंभ-
सांसारिक व्यवहार में कटुता क्रोध परेशानियों को बढ़ाने का कारण बनेगा। स्वयं पर नियंत्रण रखें। इससे बड़ा लाभ मिलेगा। 

मीन-
आजमाएं हुए कार्यों में ही लाभ की संभावनाएं तलाशने का प्रयास करें। अजनबियों और अनजान व्यक्तियों पर भरोसा न करें। रोजगार की समस्या समाप्त होगी।

शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में खीर रखने का वैज्ञानिक कारण-

शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) को कोजागरी पूर्णिमा (Kojagiri or Kojagara Purnima), ‘महारास’ या ‘रास पूर्णिमा’ (Maha Raas Leela or Raas Purnima), ‘कौमुदी व्रत’ (Kamudi Vrat) और ‘कुमार पूर्णिमा’ (Kumar Purnima) के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू धर्म में इस पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि इस पूर्णिमा के दिन धरती पर अमृत की वर्षा होती है. इसी अमृत को चखने के लिए शरद पूर्णिमा की रात खीर (Sharad Purnima Kheer) बनाकर चांद की रोशनी में रखी जाती है. अगर आप भी इस शरद पूर्णिमा की रात खीर को खुले आसमान में रखने का सोच रहे हैं तो पहले जानिए शरद पूर्णिमा की खीर बनाने की विधि-

शरद पूर्णिमा की खीर बनाने की विधि-

1. एक मोटे तले वाले बर्तन में दूध डालें और इसे एक चौथाई भाग घटने तक पकाएं.
2. दूध तीन चौथाई रह जाने के बाद इसमें दूध की मात्रा के अनुसार चावल डालें.
3. एक करछी से इस मिक्स्चर को चावल पकने तक चलाते रहें.
4. चावल अच्छे से पक जाने के बाद इसमें आवश्यकतानुसार चीनी डालें.
5. कुछ देर बाद खीर में इलाइची पाउडर और मेवे डालें.
6. खीर को 5 मिनट और चलाएं फिर गैस बंद कर दें.

वैज्ञानिक कारण :

दूध में भरपूर मात्रा में लैक्टिक एसिड होता है, जो चांद की तेज़ रोशनी में दूध के और अच्छे बैक्टिरिया को बनाने में सहायक होता है. वहीं, चावलों में मौजूद स्टार्च इस काम को और आसान बनाने में सहायक होता है. वहीं, चांदी के बर्तन में रोग-प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है.मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन चांद की रोशनी सबसे तेज़ होती है. इन्हीं सब कारणों की वजह से शरद पूर्णिमा की रात बाहर खुले आसमान में रखी खीर फायदेमंद बताई जाती है।

कैसे करें खीर का सेवन-
शरद पूर्णिमा पर अश्विनी नक्षत्र में चंद्रमा पूर्ण 16 कलाओं से युक्त होता है। खास बात यह है कि चंद्रमा की यह स्थिति साल में सिर्फ एक बार ही बनती है। कहा जाता है कि इस रात चंद्रमा के साथ अश्विनी कुमारों को भी खीर का भोग लगाने से लाभ होता है। ऐसा करते समय अश्विनी कुमारों से प्रार्थना करनी चाहिए कि हमारी जो इन्द्रियां शिथिल हो गई हों, उनको पुष्ट करें। ऐसी प्रार्थना करने के बाद फिर उस खीर का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। 

शरद पूर्णिमा पर खीर का भोग लगाने से लाभ-

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा का पूजन कर खीर का प्रसाद बांटा जाता है. माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति की आयु बढ़ती है और चेहरे पर कान्ति आने के साथ शरीर स्वस्थ बना रहता है। 

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