अतंरिक्ष की आग पर काबू : वैज्ञानिकों ने विकसित किया वैक्यूम आधारित अग्निशामक यंत्र-


 वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अग्निशामक यंत्र विकसित किया है जो अंतरिक्ष में भी काम कर सकेगा। यह यंत्र लपटों के साथ ही दहन सामाग्री को सोख लेगा। जापान के तोयोशाही यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने इस वैक्यूम आधारित अग्निशामक यंत्र को डिजाइन किया है।

(a) Flame appearance with/without suction operation. (b) time-sequential Schlieren images during the suction extinguish process. With the suction operation, the flame’s color becomes blue, suggesting that the particulate matter generated by the flame (e.g. soot) is suppressed by the reduction of residence time and harmful product gas components as well as the burning source (molten polymer in this case) are effectively drained into suction box connected to the suction pipe (where extreme vacuum condition is maintained). (Photo : COPYRIGHT (C) TOYOHASHI UNIVERSITY OF TECHNOLOGY. ALL RIGHTS RESERVED.)


यह यंत्र आम तौर पर उपयोग में लाए जाने वाले अग्निशामक यंत्रों से बिल्कुल उलट काम करता है। आमतौर पर उपयोग में लाए जाने वाले अग्निशामक यंत्र आग पर स्प्रे करते हैं, जबकि यह आग को सोख लेता है, साथ ही आग लगने का स्नेत (दहन सामाग्री) को भी सोख कर वैक्यूम चैंबर में पहुंचा देता है, जहां पूरी तरह से आग बुझा दी जाती है।

यह सिद्धांत उस जगह पर बेहद कारगर सिद्ध होगा जहां पर खुली जगह की कमी है, जैसे की समुद्र के नीचे गहराई पर मौजूद सबमरीन या अंतरिक्ष का स्पेस स्टेशन। आग लगने पर हर जगह धुआं फैल जाता है, जिससे इन संकरी जगहों पर बहुत दिक्कतें हो सकती हैं। यह नया यंत्र आग के साथ ही धुआं और दहन सामग्री सब को वैक्यूम चैंबर में पहुंचा देगा, जिससे कि वातावरण शुद्ध रहेगा। शोधकर्ताओं ने बताया कि वर्तमान में अंतरिक्ष के लिए जिन अग्निशामक यंत्रों का उपयोग होता है वह कार्बन डाइऑक्साइड का स्प्रे करते हैं। यह इसलिए कि इलेक्ट्रानिक उपकरणों में आग लगने पर इस तरह के अग्निशामक यंत्र बेहतर सिद्ध हुए हैं।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने बताया कि स्प्रे करने वाले अग्निशामक यंत्र अंतरिक्ष के लिए सही नहीं हैं, क्योंकि इससे केबिन में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्र बढ़ जाती है। इसको स्प्रे करने से पहले ऑक्सीजन का मास्क पहनना पड़ता है, जिससे आग बुझाने में देरी होती है और नुकसान ज्यादा होता है।

The research team expects VEM to be an upcoming technique in future space missions and that the concept would also be applicable for extinguishing certain unusual fire which is severe and unmanageable with currently-used extinguishers such as metal powder fire. It is also expected to be applied for the fire in clean rooms (e.g., operating room), where the spraying fire-fighting agents would cause severe damage to the structure and equipment to have large delay of reactivation. It is expected that the main role of researcher is to propose the new idea scientifically. Moreover, some years later, the concept may possibly be a component of a live product. In the future, long-term space mission will be critically considered and effective, then fire safety strategy requires reconsideration. Moreover, because a non-specialist like a newly recruited astronaut may be involved in activities in space hotel, space travel etc., easy-to-use emergency devices will be mandatory. Putting O2 mask prior to the firefighting does not sound appropriate. This concept would eventually become a new standard fire-fighting device in space. Potentially, for in house use, a “new” vacuum cleaner may have special options with this fire extinguisher. Sounds ridiculous? Maybe not.

Sach ki Dastak

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