दरगाह खुदाई में निकली हनुमान जी और शनिदेव की मूर्ति : बड़े मियाँ की मजार पर पहले मंदिर होने का दावा

UP के एटा जिले की जिस दरगाह का स्थानीय लोगों ने प्राचीन मंदिर होने का दावा किया है वहाँ खुदाई के दौरान हिन्दू देवताओं की प्रतिमाएँ मिलने की सूचना है। यह प्रतिमाएँ जलेसर थानाक्षेत्र में आने वाली दरगाह के अंदर, सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी के निर्माण की नींव खोदने के दौरान निकलीं। हिन्दू संगठनों ने इन प्रतिमाओं की शोभा यात्रा निकालने का ऐलान किया है। वहीं पुरातत्व विभाग मूर्तियों की प्राचीनता का पता लगाएगा। यह खुदाई शुक्रवार (15 अप्रैल 2022) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रस्तावित पुलिस चौकी की नींव बड़े मियाँ की मज़ार से लगभग 10 मीटर दूर खोदी जा रही थी। इस दौरान जमीन से हनुमान और शनिदेव की प्रतिमाएँ निकलीं। मूर्तियों की जानकारी मिलते ही स्थानीय भाजपा विधायक संजीव दिवाकर भी मौके पर पहुँच गए। उनकी मौजूदगी में हनुमान की प्रतिमा को पानी से और शनिदेव की प्रतिमा को तेल से धुला गया।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के एटा जिले के जलेसर कस्बा के हसायन मार्ग पर छह बीघा में दरगाह है। परिसर के एक कोने में छोटे मियां-बड़े मियां की मजार हैं। मजार से करीब 40 फीट आगे विश्राम गृह है। विश्राम गृह के पास पुलिस चौकी के निर्माण के लिए शुक्रवार को श्रमिक दोपहर में खोदाई कर रहे थे। करीब चार फीट खोदाई के बाद मिट्टी में सनी काले रंग की दो फीट की शनिदेव और डेढ़ फीट की हनुमानजी की प्रतिमा निकलीं।

इस घटना को स्थानीय भाजपा विधायक संजीव दिवाकर ने भी अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “आज 15 अप्रैल 2022 को जलेसर शनिदेव मंदिर पर पुलिस चौकी के निर्माण हेतु हो रही खुदाई के दौरान निकली शनिदेव और वीर हनुमान जी की मूर्ति। अन्य मूर्तियाँ होने की भी आशंका है। शनिदेव पर लगी श्रद्धालुओं की भीड़।” भाजपा विधायक द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में कई लोग मौके पर मौजूद दिखाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि भाजपा विधायक के साथ स्थानीय लोगों का भी दावा है कि जहाँ बड़े मियाँ की मज़ार बनी है वहाँ पहले मंदिर था। बाद में दरगाह ने धीरे-धीरे अतिक्रमण कर के मंदिर के अस्तित्व को खत्म कर दिया। इसी दौरान 13 अप्रैल को इसी दरगाह पर भगवा ध्वज लहराते एक फोटो भी वायरल हुई थी। इस पर अलीगंज के SDM अलंकार अग्निहोत्री ने इसे शनिदेव की पूजा के लिए आने वाले हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया नेजा (ध्वज) बताया था जो लाल रंग में होता है।

इसके बाद प्रशासन ने मूर्तियों को विश्राम स्थल में रखवा दिया। शांति व्यवस्था बनाए रखने को यहां पुलिस फोर्स तैनात कर धारा 144 लगा दी है।

जिलाधिकारी अंकित अग्रवाल ने बताया, मूर्तियां कितनी पुरानी हैं, इसके लिए पुरातत्व विभाग को लिखा गया है। फिलहाल खोदाई रोक दी गई है। अधीक्षण पुरातत्वविद आगरा सर्किल राजकुमार पटेल ने बताया, फोटो के आधार पर मूर्ति कितनी पुरानी है यह नहीं बताया जा सकता है। मंगलवार को वह स्वयं या टीम को भेजकर इसका परीक्षण कराएंगे।

इस दरगाह के चढ़ावे में करोड़ों रूपए के घोटाले का भी खुलासा हुआ है जिस पर पुलिस FIR दर्ज कर के जाँच कर रही है। SHO जलेसर इंस्पेक्टर शंभूनाथ ने बताया, “मौके पर पर्याप्त पुलिस बल के साथ PAC को भी तैनात है। लॉ एन्ड ऑर्डर की स्थिति पूरी तरह से सामान्य है।”

30 साल पहले हुआ था दरगाह का जीर्णोद्धार : छोटे मियां-बड़े मियां दरगाह पर बुधवार और शनिवार को जात (मेला) होती है, आम दिनों में पांच हजार से दस हजार तक लोग आते हैं। उर्स के दौरान लाखों लोगों की भीड़ आती है।

यह दरगाह आजादी से पूर्व की बताई जाती है। इसके अंदर दीवारों पर घोड़ों की आकृति बनी हुई है। 30 वर्ष पूर्व दरगाह का जीर्णोद्धार कराया गया था।

99 करोड़ के गबन के बाद सुर्खियों में है दरगाह : हाल ही में दरगाह कमेटी द्वारा 99 करोड़ के गबन किए जाने का पर्दाफाश हुआ था। दरगाह कमेटी के अध्यक्ष अकबर अली समेत नौ पदाधिकारियों के खिलाफ गबन की जलेसर कोतवाली में एफआइआर दर्ज है। कमेटी के सदस्यों की संपत्ति की जांच चल रही है। प्रशासन ने दरगाह को अपने कब्जे में लेकर रिसीवर की नियुक्ति कर दी है, तब से प्रशासन की देखरेख में ही जाँच हो रही है। गबन का मामला सामने आने से पहले जलेसर क्षेत्र के ग्राम प्रधान शैलेंद्र सिंह राजपूत, पूर्व प्रधान हुड्डो देवी समेत 12 ग्रामीणों ने शपथ पत्र देकर दरगाह स्थल पर शनि मंदिर होने का दावा किया था।

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