कांग्रेस की मांग, पेट्रोल और डीजल पर लगाएं उत्पाद शुल्क को वापस से मोदी सरकार

नयी दिल्ली।

दिल्ली में इस समय पेट्रोल की कीमत 89.29 रुपये प्रति लीटर है वहीं डीजल 79.70 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।

सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते ऐसा हुआ है। लेकिन ये सच आधा है क्योंकि ईंधन की कीमत तब भी महंगी थी जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम थी। हालत ये है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी पेट्रोल की कीमत 51 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीजल 52 रुपये 91 पैसे पर बिक रहा है। यानी पड़ोसी देशों के मुकाबले भी भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

कांग्रेस ने पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर मंगलवार को सरकार पर देश की जनता से 20 लाख करोड़ रुपये वसूलने का आरोप लगाया और कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों पर पिछले साढ़े छह वर्षों के दौरान उत्पाद शुल्क में की गई वृद्धि को वापस लिया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।

पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा ‘‘अगर सरकार ‘मोदी टैक्स’रूपी अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को वापस लेती है तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत घटकर 61.92 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 47.51 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी।’’

उन्होंने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क का तुलनात्मक आंकड़ा पेश करते हुए दावा किया कि सरकार लगातार भावनात्मक मुद्दे गढ़ती है ताकि लोगों का ध्यान पेट्रोल-डीजल एवं रसोई गैस की बढ़ती कीमतों की ओर नहीं जाए। खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछले छह साल में पेट्रोल-डीजल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाकर सरकार 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक कमा चुकी है। 2014 में संप्रग के चुनाव हारने के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल थी तो दिल्ली में पेट्रोल 71.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 57.28 रुपये प्रति लीटर बिकता था।’’

उनके मुताबिक, फरवरी, 2021 में कच्चे तेल की कीमत 54 डॉलर प्रति बैरल है तो दिल्ली में पेट्रोल 89 रुपये और डीजल करीब 80 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ‘‘छह वर्षों में सरकार ने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 23.78 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 28.37 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया।

मैं इसे ‘मोदी टैक्स’ कहूंगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब समझ में आ जाना चाहिए कि यह सरकार रोजाना नए-नए विवादों को गढ़ती है ताकि लोगों का ध्यान इस तरफ नहीं जाए।’’ खेड़ा ने सवाल किया, ‘‘20 लाख करोड़ रुपये कहां गये क्योंकि सरकार कहीं भी कुछ अच्छा करते हुए नहीं दिख रही है?’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम यह मांग करते हैं कि उत्पाद शुल्क को वापस लीजिए। अगर साढ़े छह साल में लगाए गए अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को वापस लिया जाता है तब दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 61.92 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 47.51 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी।

भारत में क्यों महंगा है पेट्रोल डीजल?

आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने से भारत में भी पेट्रोल डीजल सस्ता होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत कम हुई तो केंद्र और राज्य सरकारों ने ज्यादा टैक्स लगाना शुरू किया। सरकार ने भी इस अवसर का इस्तेमाल अपना राजस्व बढ़ाने के लिए किया।

कच्चे तेल की क्यों बढ़ रही है कीमत?

कोरोना के कम होते असर से अब ईंधन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ने लगी है। कोविड वैक्सीन के आने का असर ईंधन की कीमतों में उछाल से देखा गया। ईंधन की कीमत इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि कई देशों ने उत्पादन कम किया है और बहुत नियंत्रित तरीके से बाजार में ईंधन की सप्लाई की जा रही है।

टैक्स पर ईंधन की कीमत पर क्या है असर?

केंद्र सरकार ने 2020 की शुरुआत से अब तक पेट्रोल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 32.98 रुपये प्रति लीटर कर दी है वहीं डीजल पर इसे 31.83 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया गया है। कई राज्यों ने सेल्स टैक्स भी बढ़ाया है। दिल्ली सरकार ने पेट्रोल पर वैट बढ़ाया है। फिलहाल इस समय दिल्ली में दिल्ली और केंद्र सरकार मिलकर पेट्रोल पर बेस प्राइस का 180 प्रतिशत टैक्स ले रहे हैं वहीं डीजल पर बेस प्राइस से 141 प्रतिशत टैक्स वसूला जा रहा है। पेट्रोल पर वैट या सेस की बात की जाए तो राजस्थान 36, मध्य प्रदेश 33, दिल्ली 30, उत्तर प्रदेश 26.80, पंजाब 25 प्रतिशत टैक्स वसूल रहे हैं। इसी तरह डीजल पर भी वैट या सेस वसूला जा रहा है।

दूसरे देशों में क्या है स्थिति?

अमेरिका, चीन और ब्राजील की बात की जाए तो वहां इस समय लोग पेट्रोल और डीजल पर ठीक एक साल पहले की तुलना में कम कीमत दे रहे हैं। अमेरिका में एक साल पहले के मुकाबले 7.5 प्रतिशत , चीन में 5.5 प्रतिशत और ब्राजील में 20.6 प्रतिशत कम कीमत ग्राहक चुका रहे हैं।

महंगाई पर क्या है असर?

जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल के महंगे होने को खाने-पीने की चीजों के सस्ते होने ने बैलेंस कर दिया है। कुल मिलाकर जनवरी में महंगाई कम रही है। हालांकि जो लोग काफी ट्रैवल करते हैं उनको महंगा होता ईंधन काफी दिक्कत दे रहा होगा। शहरों में लोग महंगे होते पेट्रोल डीजल से ज्यादा परेशान हैं जबकि गांवों में सिंचाई के लिए महंगा होता डीजल किसानों को परेशान कर रहा है।

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