तीर्थ : भगवान श्री नाथ जी मंदिर – 

अभी कुछ दिन पहले आपने सुना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहरीन की दो दिनों की अपनी यात्रा के दौरान बहरीन की राजधानी मनामा में  स्थित 200 साल पुराने भगवान श्री नाथ के मंदिर की पुनर्निर्माण परियोजना का शुभारंभ किया जिसस पर 42 लाख डॉलर की लागत आएगी। थट्टाई हिंदू सौदागर समुदाय के अध्यक्ष बॉब ठाकेर ने कहा कि नवनिर्मित ढांचा 45,000 वर्ग फुट में होगा और इसके 80 फीसदी हिस्से में कहीं अधिक श्रद्धालुओं के लिए जगह होगी।
उन्होंने कहा कि मंदिर से लगा एक ज्ञान केंद्र और एक संग्रहालय भी होगा। इस देश की यात्रा करने वाले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं। पीएम ने ट्विटर पर लिखा , बहरीन में प्रवासी भारतीयों के साथ बातचीत व खाड़ी क्षेत्र में भगवान श्रीनाथजी सहित पुराने मंदिरों के पुनर्निर्माण के विशेष समारोह में उपस्थित रहना मेरे लिए एक सम्मान की बात है। अब आप सोच रहे होगें कि आखिर! यह श्री नाथ जी कौन हैं? इनकी क्या महिमा है, क्या कोई चमत्कार जुड़ा है? तो बिल्कुल हाँ श्री नाथ जी चमत्कारी हैं।
बता दें कि  श्रीनाथजी श्रीकृष्ण भगवान के ७ वर्ष की अवस्था के रूप हैं। इनका स्‍वरूप राजस्थान में उदयपुर के निकट राजसमन्‍द जिले के नाथद्वारा के श्रीनाथजी मन्दिर में विराजमान है। जहां हर साल लाखों-करोड़ों लोग श्रीनाथ जी के दर्शन हेतु नाथद्वारा आते है। दर्शन के दौरान श्रद्धालु श्रीनाथ जी की थुड्डी मेे (दाड़ी) में लगे हीरे को भी देखना पसंद करते है। नाथद्वारा में हर साल धुलंडी पर एक सवारी निकलती है, नाम बहुत दिलचस्प है ‘बादशाह की सवारी’। यह सवारी नाथद्वारा के गुर्जरपुरा मोहल्ले के बादशाह गली से निकलती है।
यह एक प्राचीन परंपरा है जिसमें एक व्यक्ति को नकली दाढ़ी-मूंछ, मुग़ल पोशाक और आँखों में काजल डालकर दोनों हाथो में श्रीनाथ जी की छवि देकर उसे पालकी में बैठाया जाता है। इस सवारी की अगवानी मंदिर मंडल का बैंड बांसुरी बजाते हुए करता है।यह सवारी गुर्जरपुरा से होते हुए बड़ा बाज़ार से आगे निकलती है तब बृजवासी सवारी पर बैठे बादशाह को गलियां देते है। सवारी मंदिर की परिक्रमा लगाकर श्रीनाथ जी के मंदिर पंहुचती है, जहां वह बादशाह अपनी दाढ़ी से सूरजपोल की सीढ़ियां  साफ़ करता है जो कि लम्बे समय से चली आ रही एक प्रथा है। उसके बाद मंदिर के विभाग-प्रमुख बादशाह को पैरावणी भेंट करते है। इसके बाद फिर से गालियों का दौर शुरू होता है, मंदिर में मौजूद लोग बादशाह को खरी-खोटी सुनते है और रसिया गान शुरू होता है। तब आसपास का माहोल ऐसा हो जाता है मानो मथुरा-वृन्दावन में होली खेल रहे हो। 

इस सब के पीछे की वजह यह है कि नाथ द्वारा में मान्यता है कि जब औरंगजेब श्रीनाथ जी की मूर्ति को खंडित करने मंदिर में आया था तो मंदिर में पंहुचते ही अँधा हो गया था। तब उसने अपनी दाढ़ी से मंदिर की सीढियाँ साफ़ करते हुए श्रीनाथ जी से विनती की और वह ठीक हो गया। उसके बाद औरंगजेब ने बेशकीमती हीरा मंदिर को भेंट किया जिसे हम आज श्रीनाथ जी के दाढ़ी में लगा देखते है। बस इसी घटना को हर साल धुलंडी पर ‘बादशाह की सवारी’ निकालकर याद किया जाता है। यह सवारी नाथद्वारा के अलावा ब्यावर, पली और अजमेर में भी निकली जाती है।

कैसें पहुंचे श्री नाथ जी मंदिर –

श्रीनाथजी का तकरीबन 337 वर्ष पुराना मन्‍दिर राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर स्थित रोडवेज बस स्‍टेण्‍ड से मात्र 1 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। जहाँ से मन्‍दिर पहुँचने के लिए निर्धारित मूल्‍य पर (वर्तमान में प्रति व्‍यक्ति 5 रूपये) सार्वजनिक परिवहन ऑटो रिक्‍शा सेवा उपलब्‍ध है। श्रीनाथद्वारा दक्षिणी राजस्‍थान में 24/54 अक्षांश 73/48 रेखांश पर अरावली की सुरम्‍य उपत्‍यकाओं के मध्‍य विश्‍वप्रसिद्ध झीलों की नगरी उदयपुर से उत्तर में 48 किलोमीटर दूर राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 8 पर स्‍थित है।

श्रीनाथद्वारा से, उत्तर – श्रीनाथद्वारा के उत्तर में राजसमन्‍द (17) अजमेर (225) पुष्‍कर (240) जयपुर (385) देहली (625) प्रमुख शहर हैं।

दक्षिण – श्रीनाथद्वारा के दक्षिण में उदयपुर (48) अहमदाबाद (300) बडौदा (450) सूरत (600) मुम्‍बई (800) स्थित हैं।

पूर्व – श्रीनाथद्वारा के पूर्व में मंडियाणा ((रेल्‍वे स्‍टेशन (12)) मावली ((रेल्‍वे स्‍टेशन (28)) चित्तौडगढ (110) कोटा (180) स्थित हैं।

पश्चिम – फालना (180) जोधपुर (225) स्थित हैं।

बस सेवा – श्रीनाथद्वारा के उत्तर, दक्षिण, पूर्व, प‍श्चिम में स्थित सभी प्रमुख शहरों से सीधी बस सेवा उपलबध है।

ट्रेन सेवा  – श्रीनाथद्वारा के निकटवर्ती रेल्‍वे स्‍टेशन मावली (28) एवं उदयपुर (48) से देश के प्रमुख शहरों के लिए ट्रेन सेवा उपलब्‍ध है।

वायु सेवा – श्री‍नाथद्वारा के निकटवर्ती हवाई अड्डे डबोक (48) से देश के प्रमुख शहरों के लिए वायुयान सेवा उपलब्‍ध है।

श्रीनाथद्वारा पुष्टिमार्गीय वैष्‍णव सम्‍प्रदाय की प्रधान (प्रमुख) पीठ है। यहाँ नंदनंदन आनन्‍दकंद श्रीनाथजी का भव्‍य मन्‍दिर है जो करोडों वैष्‍णवो की आस्‍था का प्रमुख स्‍थल है, प्रतिवर्ष यहाँ देश-विदेश से लाखों वैष्‍णव श्रृद्धालु आते हैं जो यहाँ के प्रमुख उत्‍सवों का आनन्‍द उठा भावविभोर हो जाते हैं। तो देर किस बात की भगवान श्री नाथ जी के मंदिर पहुंचिये और आप भी महापुण्य और प्रभु के चमत्कारों की सुन्दर अनुभूति कीजिये।

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