कविता ✍️मेरा इश्क 

याद आते हैं मुझको उसके वो गोरे गोरे गाल,
तिरछी आंखे उसकी और वो भूरे – भूरे बाल,,अदा भी क्या खूब थी उसकी बातूनी यारों,
बातें भी उसकी कमल पुष्प सी थी कमाल,,

जब वह हंसती तो जैसे चमेली थी झरती,
बांसुरी की धुन सी मधुर थी उसकी चाल,,

थोड़ी अल्हड़ थोड़ी थी नादान वह यारों, 
समझ सकी शायद न इसलिए मेरा हाल,,

कई आई और गई सिलसिला चलता रहा,
पर इसने दिल में कर के रख दिया बवाल,, 

समय रहते कर सका न इजहार तीरथ,
रहता है हरदम इसी बात का मुझे मलाल,,

 

-आशुतोष मिश्र तीरथ 
         गोण्डा 

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