“जाति बदली, धर्म बदला, बदल दिया है गोत्र, दादा गड़े ज़मीन में, पंडित हो गया पौत्र।”
सच की दस्तक डिजिटल न्यूज डेस्क लखनऊ
“जाति बदली, धर्म बदला, बदल दिया है गोत्र,
दादा गड़े ज़मीन में, पंडित हो गया पौत्र।”
उक्त पंक्तियां भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल ने मंगलवार शाम लखनऊ स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में ‘सच की दस्तक’ से विशेष बातचीत के दौरान कहीं।
श्री पाल ने कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी स्वयं को कश्मीरी पंडित बताते हैं, जबकि उनके अनुसार राहुल गांधी के पारिवारिक इतिहास को लेकर कई प्रश्न हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के दादा पारसी थे, ऐसे में उन्हें इस विषय पर देश के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके परिवार का मूल उपनाम “गैंडी” था, जिसे बाद में “गांधी” कर दिया गया।
प्रकाश पाल ने आगे आरोप लगाया कि राहुल गांधी के परिवार के सदस्य समय-समय पर विदेशी आक्रांताओं की मजारों पर जाते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1959 में जवाहरलाल नेहरू, 1968 में इंदिरा गांधी तथा 1976 में राजीव गांधी और सोनिया गांधी भी बाबर की मजार पर गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी वर्ष 2005 में बाबर की मजार पर गए थे। श्री पाल ने कहा कि राहुल गांधी को देश को बताना चाहिए कि विदेशी आक्रांताओं की मजारों से उनका इतना लगाव क्यों है। उन्होंने बाबर पर भारत में मंदिरों को ध्वस्त करने और अत्याचार करने के आरोप लगाते हुए कहा कि इतिहास में इन घटनाओं का उल्लेख मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी पृथ्वीराज चौहान के स्मारक पर क्यों नहीं जाते हैं और उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी प्राथमिकता क्या है।
श्री पाल ने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों की शिक्षा नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1947 से 1970 के बीच कांग्रेस सरकारों ने एक ही समुदाय के नेताओं को शिक्षा मंत्री बनाया, जिससे भारतीय इतिहास को विकृत किया गया। उन्होंने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद, हुमायूं कबीर, मोहम्मद करीम छागला और बदरुद्दीन तैयबजी जैसे नेताओं के कार्यकाल में भारतीय इतिहास को बदलकर मुगल शासकों का महिमामंडन किया गया। उन्होंने दावा किया कि जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इतिहास के तथ्यों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया, तब कांग्रेस ने इसका विरोध किया।
प्रकाश पाल ने आगे आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक मामले को राजनीतिक हथियार बनाकर विरोध-प्रदर्शनों को समर्थन दिया गया। उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति थी। उन्होंने राहुल गांधी के कथित 20 दिनों के “गुप्त दौरे” का उल्लेख करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसा संवैधानिक पद संभालने वाले व्यक्ति को अपनी गतिविधियों के बारे में जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लौटने के बाद राहुल गांधी ने आंदोलनकारियों का समर्थन किया, संसद की कार्यवाही बाधित की और तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को बल दिया।
श्री पाल ने यह भी कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों में होने वाली घटनाओं पर उसका रुख अलग क्यों दिखाई देता है। उनके अनुसार, कांग्रेस को इस विषय पर जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।





