कोर्ट ने मारपीट के मामले में जिग्नेश मेवानी को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा, खारिज की जमानत याचिका

असम के बारपेटा जिले की एक अदालत ने एक महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दायर मारपीट के मामले में मंगलवार को गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मुकुल चेतिया ने मेवानी को दोपहर में अदालत में पेश किये जाने के बाद पुलिस हिरासत में भेज दिया। मेवानी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 294, 323, 353 और 354 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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सोमवार को कोकराझार जिले के एक अन्य मामले में जमानत पर रिहा होने के तुरंत बाद उन्हें इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। कांग्रेस समर्थित निर्दलीय विधायक मेवानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ट्वीट करने के लिए पहली बार 19 अप्रैल को गुजरात के पालनपुर शहर से गिरफ्तार किया गया था, और कोकराझार लाया गया था। आरोप है कि जब वह वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ गुवाहाटी हवाईअड्डे से कोकराझार जा रहे थे तो उन्होंने महिला अधिकारी से मारपीट की।

कांग्रेस समर्थित एवं उत्तर गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी को 20 अप्रैल को असम पुलिस ने पालनपुर सर्किट हाउस से गिरफ्तार किया था। असम में उनके खिलाफ दर्ज हुए एक मामले की जांच के चलते पुलिस ने यह कार्रवाई की गई थी। जिग्नेश मेवानी ने देश में हिंसक घटनाओं को लेकर एक ट्वीट किया था, जिसमें लिखा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाथूराम गोडसे का पुजारी, की विचारधारा में मानते हैं इसलिए वे देश में शांति की अपील नहीं करेंगे।इस ट्वीट से नाराज मोदी समर्थक की ओर से असम में जिग्नेश मेवानी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने बताया कि उनके खिलाफ दर्ज शिकायत को लेकर ही उनको हिरासत में लिया गया तथा ट्रांजिट रिमांड पर अहमदाबाद से दिल्ली तथा दिल्ली से असम ले जाया गया। जमानत मिलने के बाद एक अन्‍य मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेन बोरा और विधायक दिगंता बर्मन व एस के राशिद ने यहां पार्टी कार्यालय से कोकराझार पुलिस थाने तक एक मौन मार्च किया, जहां मेवानी को उनकी पुलिस हिरासत के दौरान रखा गया था।



राहुल गांधी ने गिरफ्तारी को बताया था ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘असंवैधानिक’

मेवानी की रिहाई की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक और नेता रोजाना प्रदर्शन कर रहे थे। एआईयूडीएफ और माकपा सहित अन्य विपक्षी दलों के साथ-साथ राज्य के एकमात्र निर्दलीय विधायक ने भी पुलिस हिरासत के दौरान मेवानी से मुलाकात की थी और उन्हें अपना समर्थन देने का वादा किया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को असम पुलिस की ओर से जिग्नेश मेवानी की गिरफ्तारी को ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘असंवैधानिक’ करार दिया था।

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